कभी-कभी अचानक कुछ हादसे ऐसे होते है जो
इन्सान को सोचने पर मज़बूर कर देते है I
मै अपने पिताजी के साथ किसी रिश्तेदार के घर
जा रहा थाI पिताजी कार चला रहे थे और मै उनके
बगल मे बैठा था I कार की स्पीड १०० कि.मी. प्रति
घंटा होगी I आगे एक अंधा मोड़ था, पिताजी ने कार
की स्पीड धीमे की, तभी दूसरी तरफ़ से एक ट्रक तेजी
से आ रहा था और आकर अचानक हमारी गाड़ी के सामने
से गुजरा....अचानक ऐसे लगा की आज़ तो गये...लेकिन
पिताजी ने साइड से निकाल लिया....बाल-बाल बचे I मुझे
बहुत गुस्सा आया, मै गाड़ी से उतरा चिल्लाकर ट्रकवाले
को भला-बुरा कहने लगा I वह तेज़ी से ट्रक चलाते हुए आगे
निकल गया, तभी मेरी नज़र ट्रक के निचले हिस्से पर गयी
जिस पर लिखा था,
वो बाग भी उज़ड़ गये, जिसमें हज़ारों माली थे,"
जब गया दुनिया से सिकंदर, दोनो हाथ खाली थे"
यह कोटेशन पढ़कर एकबार दिमाग झल्ला गया फिर सोचने
लगा, वाकई आज़ हमारे पास पैसा तो है पर खर्च करने का
वक्त नही, अपनों के लिये मन में श्रद्धा है पर व्यक्त करने
को वक्त नही, अपनों के साथ दो प्यार के वक्त बितानें का
भी समय नही.....और एक दिन इसी आपाधापी में ना जाने
कब इस दुनिया को छोड़कर चले जायेंगे...और फिर पछताने
को भी वक्त नही मिलेगा....I उस ट्रक की कोटेशन ने मुझे
सोचने पर मजबूर कर दिया...और अब मैं पैसे के साथ साथ
अपनों के लिये वक्त भी कमाता हूँ और कोशिश करता हूँ कि
जब तक जियूँ अपने लम्हो को यूँ ही दौड़-भाग में बर्बाद ना
करूँ....जिन्दादिली से जीयूँ...अपनों के साथ जिहूँ...खुश रहूँ... ...I
और सबको खुश रखूँ....I
हाँ जब तक जीवन है उसे जिंदादिली से जिया जाये.....
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